Posts

Showing posts from May, 2020

किसान के घर में क्यों हुआ अचानक ब्लास्ट , जंगली जानवरो से था परेशान किसान !

Image
किसान के घर मे अचानक हुआ विस्फोट ,बच्ची समेत 2 लोग गंभीर रूप से घायल ! उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ के थाना बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव जखेड़ा में अचानक हुए जोरदार धमाके से इलाके में हड़कंप मच गया, दरअसल किसान द्वारा खेतो में जंगली जानवर  भगाने के लिए घर में इमामदस्ते में एक साथ गंधक-पोटाश कूटने से अचानक जोरदार धमाका हो गया, धमाके में किसान के साथ एक बच्ची घायल हो गई, आनन-फानन में ग्रामीणों ने दोनों घायलों को भर्ती अस्पताल में भर्ती कराया, जहां घायल किसान को गंभीर हालत के चलते मेरठ रेफर कर दिया गया, तो वही घायल बच्ची का गढ़मुक्तेश्वर अस्पताल में इलाज चल रहा है। दरअसल आपको  बता दें आज बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव जा खेड़ा में इश्तेकार नामक युवक खेतों से बंदर व जंगली जानवर भगाने के लिए गंधक पोटाश का मिश्रण तैयार कर रहा था, जिससे मिश्रण तैयार करते समय अचानक आग लग गई, और विस्फोट हो गया, अचानक हुए इस विस्फोट से इस प्रकार का सीधा हाथ जख्मी हो गया, और घर में खेल रही 7 वर्षीय बच्ची आशिया भी घायल हो गई, विस्फोट की आवाज से आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया, आनन-फ...

पिछले 68 सालों में पीपल, बरगद, नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना क्यों बन्द हुआ !

Image
क्या आप जानते है, पीपल बरगद नीम आदि पेड़ों को सरकार ने क्यो लगवाना बंद किया आइए जानते है विस्तार से ! पिछले 68 सालों में पीपल, बरगद,पकड़ी और नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना क्यों  बन्द किया गया है पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजार्बर है, बरगद 80% और नीम 75 %  अब सरकार ने इन पेड़ों से दूरी बना ली तथा इसके बदले विदेशी यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया जो जमीन को जल विहीन कर देता है आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ो ने ले ली है अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा  हर 500 मीटर की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगाए जाए तो आने वाले कुछ साल भर बाद प्रदूषण मुक्त हिन्दुस्तान होगा  वैसे आपको एक और जानकारी दे दी जाए पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है जिसकी वजह शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं। पीपल को वृक्षों का राजा कहते है।  अब करने योग्य कार्य इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगाया जाए तथा यूकेलिप्टस पर बैन लगाया...

लॉकडाउन ने तोड़ी किसानो की कमर, नहीं चाहिए अब मोदी सरकार से 'कर्ज'

Image
3 लाख रुपए ब्याज़ पर लेकर की थी फूल की खेती, आज खड़ी फसल को ट्रेक्टर चलाकर उजाड़ दी , लॉकडाउन किसानों के लिए बना काल ।  विश्वभर में कोरोना वायरस से हाहाकार मचा हैं, देश में भी कोरोना वायरस ने अपने पेर पसार लिए हैं, कोरोना वायरस का बड़ा असर किसानों पर काल बनकर टूट रहा हैं , मेरठ मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर दूर मेरठ ब्लॉक के रिठानी गांव  के रहने वाले किसान सोनू पिछले 8 सालों से लगातार खेती कर रहे हैं हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी फूल की खेती की थी लगभग 40 बीघा फूल खेत मे खड़ा है ,  सोनू बताते हैं की हम हर साल फूल  व सब्जी की खेती करते हैं, लॉकडाउन के चलते हैं हमारी फसल को काफी नुकसान हुआ है, जो हर वर्ष 50 से 60 रुपए प्रतिकिलो बेचा जाता था, आज वह पशुओं को खिलाया जा रहा है, किसान की हालत सरकार क्या जाने वह आगे बताते हैं की हमने 3 लाख रुपए ब्याज पर लिए थे जिसे हम फूल से अच्छा मुनाफ़ा कमा सकें, पैसा डूब चुका है फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, मजदूरों का पैसा भी जेब से देना पड़ रहा है, क्या करें किसान तो सड़क पर आ गया । लॉकडाउन किसानों के लिए काल बनकर टूटा  सोनू बताते हैं कि ल...

क्या आप फालसा (फल) के बारे में जानते है , इस फल में सबसे ज्यादा आइरन पाया जाता है

Image
फालसा व आड़ू की खेती बड़े पैमाने पर लॉकडाउन का असर बाग पर भी पड़ा मेरठ  जनपद के सर्किट हॉउस में फालसा आड़ू व आम की खेती कर रहे गंगाराम को इस बार बड़ा झटका लगा है , वह बताते है कि हमने इस बार बाग ठेके की नीलामी में हिस्सा बने जो 81 हज़ार की रकम तय की गई , महज कुछ ही दिन बाद लॉकडाउन लग गया और आड़ू व फालसा की फसल पूरी तरह तैयार हैं उधर आम का सीजन भी आ गया हैं , पता नही लॉकडाउन कब खुलेगा हमे तो इस बार बड़ा झटका लगा हैं पूरा परिवार बाग की निगरानी में लगा है छोटे बच्चे से लेकर बड़े सब लोग बाग की देखभाल में लगे है , लेकिन अब माल लेकर मंडी लेकर जाते भी है तो सही दाम नही मिल रहा , बस यही है अब जो सर्किट हाउस में लोग सुबह शाम घूमने आते है वो ही कुछ माल यहाँ से ले जाते है जिस से कुछ हमारी जमा राशि का हिस्सा निकल रहा हैं । पेड़ों पर फालसा व आड़ू की भरमार फसल    गंगाराम बताते है कि इस समय फालसा व आड़ू की अच्छी पैदावार है लेकिन लॉकडाउन से बड़ा झटका इस बार लगा हैं, आगे बताते है कि इस बार माल यही से बेचा जा रहा हैं जो लोग सर्किट हाउस में घूमने आते है वो ही लोग यहाँ से खरीद कर ले जाते हैं, लेकिन माल ज...

कितना ख़तरनाक हो सकता है टिड्डियों का हमला ?

Image
किसान रहे सतर्क , टिड्डी कीट से बचने के उपाय ! टिड्डी कीट के नाम से अधिकतर लोग परिचित होंगे, यह लगभग दो से ढाई इंच लम्बा कीट होता है। यह बहुत ही डरपोक होने के कारण समूह मे रहते हैं। टिड्डी दल किसानों का सबसे बड़ा शत्रु है।  टिड्डियाँ 1 दिन में 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती हैं हालांकि इनके आगे बढ़ने की दिशा हवा की गति पर निर्भर करती है। टिड्डी दल सामूहिक रूप से लाखों की संख्या में झुंड/समूह बनाकर पेड़ - पौधे एवं वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यह दल 15 से 20 मिनट में आपकी फसल के पत्तियों को पूर्ण रूप से खाकर नष्ट कर सकते हैं। यह सभी प्रकार के हरे पत्तों पर आक्रमण करते हैं। ये टिड्डी दल किसी क्षेत्र में शाम 6 से 8 बजे के आस-पास पहुँचकर जमीन पर बैठ जाते हैं। टिड्डी दल शाम के समय समूह में पेड़ों, झाड़ियों एवं फसलों पर बसेरा करते हैं और वही पर रात गुजारते हैं तथा रात भर फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं और फिर सुबह 8 -9 बजे के करीब उड़ान भरते हैं। अंडा देने की अवधि में इनका दल एक स्थान पर 3 से 4 दिन तक रुक जाता है। आप लोगों को अवगत कराना है कि बड़े आकार का टिड्डी दल राजस्थान...

उत्तरप्रदेश के अकेले किसान चीकू व लोकट की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं, कमाते है लाखो रुपए सालाना

Image
उत्तरप्रदेश के अकेले किसान चीकू व लोकट की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं, कमाते है लाखो रुपए सालाना  उत्तरप्रदेश के मेरठ जनपद मुख्यालय से लगभग 13 किलोमीटर दूर डोरली गांव के रहने वाले विजयपाल पिछले 8 सालों से चीकू व लोकाट की बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं , वह दावा कर बताते है कि पूरे उत्तरप्रदेश में बड़े पैमाने पर मैं एक अकेला किसान हु जो चीकू व लोकाट की खेती कर रहा हूँ ,  वह आगे बताते है कि मैंने 15 बीघा में चीकू व लोकाट के पेड़ लगाए हुए हैं जिसमे मेरा फल अन्य राज्यो में जाता हैं, लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते अपने फल को फर्म के बाहर ही रख कर बेचना पड़ रहा , नुकसान है लेकिन इतना नही हैं क्यों कि हमारा फल इस लिए बिक रहा हैं यहाँ लोग आते है खुद ही तोड़ कर ले जाते हैं । अधिकतर फोन पर ही ऑर्डर मिलते हैं विजयपाल आगे बताते हैं कि हमें अधिकतर फोन पर ही आर्डर मिलते हैं, क्योंकि हमारा फल थोड़ा महंगा इसलिए भी है मेहनत ज्यादा लगती है और साफ व स्वच्छ प्राकृतिक चीकू व लोकाट है , हम कोई भी बाहर का उर्वरक नही लगाते सब जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं । अपने फर्म पर 5 से 7 मजदूरों को रोजग...