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Showing posts from June, 2020

अगर आप किसान है तो आपके मतलब की खबर, नींबू की खेती का पूरा गणित !

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 नींबू की खेती सी जुड़ी जानकारी आपको विस्तार से दी जा रही है।  नींबू अपने खट्टे और जायकेदार स्वाद के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। अंग्रेजी में लेमन नाम से प्रसिद्ध यह फल किसान भाइयों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। नींबू का पेड़ शौकिया तौर पर या घर की जरूरत के अनुसार तो सभी लगाते हैं लेकिन अगर इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाए तो साधारण अनाज की खेती से अधिक आय पाई जा सकती है। नींबू का सेवन देशभर में बड़ी मात्रा में किया जाता है साथ ही कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में नींबू युक्त उत्पादों की भरमार है। नींबू की खेती के लिए स्थान  भूमि को व्यापक रूप से जोता जाना आवश्यक है गहन जुताई के बाद खेतों को समतल किया जाना चाहिए. पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों के साथ की जगहों में नींबू का रोपण किया जाता है। ऐसी भूमि में उच्च घनत्व रोपण संभव है क्योंकि समतल जगह की तुलना में पहाड़ी ढलान पर ज्यादा कृषि उपयोग हेतु जगह उपलब्ध रहती है l लोकप्रिय नींबू के प्रकार पंजाब बारामासी ,पंजाब गलगल , पीएयू बारामासी ,यूरेका, रसराज, लिस्बन, लखनऊ बीज रहित , असम नींबू पंत नींबू, इतालवी नींबू , म...

मधुमक्खी पालन कर शहद का व्यापार शुरू करे, कम लागत में लाखो कमाए !

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शहद का व्यापार शुरू करे कमाए लाखो रुपए सालाना ! एक डिब्बे मधुमक्खी से प्राप्त होने वाले 50 किलो शहद को अक्सर 100 रु. प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है. अतः प्रत्येक डिब्बे से आपको रू 5,000 प्राप्त होते हैं. बड़े पैमाने पर इस व्यापार को करने से प्रति महीने 1 लाख 15 हज़ार रूपए तक का लाभ प्राप्त हो सकता है. इसके अलावा शहद एवं मोम के अतिरिक्त अन्य पदार्थ, जैसे गोंद (प्रोपोलिस, रायल जेली, डंक-विष) भी प्राप्त होते है। विदेशों में कई डॉलर मे इनकी बिक्री की जाती है। मधुमक्खी से प्राप्त होने वाला मोम काफी उच्च कीमतों पर बिकता हैं। कैसे शुरू करे व्यापार  शुरूआती दौर में पांच कलोनी (पांच बाक्स) से शुरू कर सकते है एक बॉक्स में लगभग में चार हजार रुपए का खर्चा आता है तो अगर आप पांच ऐसे बॉक्स लेंगे तो बीस हजार रुपए का खर्चा आता है। इनकी संख्या को बढ़ाने के लिए समय समय पर इनका विभाजन कर सकते हैं। अगर ठीक से विभाजन से कर लिया तो एक साल में 20000 हजार बक्से तैयार किए जा सकते हैं। दिल्ली में नेशनल बी बोर्ड से प्रमाणित संस्थाएं है उनसे आप मधुमक्खियों को खरीद सकते है। उद्यान विभ...

किसानो का अवैध खनन को लेकर जल सत्यग्रह

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महिला किसानो का जल  सत्याग्रह,  क्यों कर रही है विरोध ! उत्तरप्रदेश के जनपद खपटिहा कला खदान में अवैध खनन और किसानों की भूमि से जबरन निकाली जा रही बालू तथा ठेकेदारों और माफिया सिंडिकेट की दबंगई के विरोध में महिला पुरुष किसानों ने सोमवार को खदान के पास नदी में जल सत्याग्रह किया। पानी में घंटो तक बैठे रहे माफियाओं और प्रशासन के विरुद्ध जमकर  नारेबाजी की । आरोप लगाया कि बालू माफिया किसानों को धमकी दे रहे हैं सोमवार को दर्जनों महिलाओं पुरुषों ने नदी की जलधारा में बैठकर जल सत्याग्रह किया। जल सत्यग्रह करते किसान  कुछ ही देर बाद पुलिस की मौजूदगी भी  आंदोलन चला। दोपहर को एसडीएम राम कुमार और पुलिस क्षेत्र अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत की प्रशाशन की नोकझोंक भी हुई किसानों ने आरोप लगाया कि बालू खदानों के गुर्गे महिला किसानों से अश्लीलता कर रहे हैं। आंदोलन कर रही ऊषा निषाद आदि ने एसडीएम को इस बाबत ज्ञापन भी सौंपा। इस पर एसडीएम ने पैलानी क्षेत्राधिकारी और तहसीलदार तथा जिला खनिज अधिकारी को पत्र जारी कर पूछा ऊषा निषाद और अन्...

किसान टिड्डियों से कमा रहे प्रतिदिन के 20 हजार रुपए, जाने कैसे ?

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एक तरफ भारत के किसान  टिड्डियों से परेशान है तो वही दूसरी और पाकिस्तान के किसान इन्ही टिड्डियों से पैसा कमाने में लगे है !  टिड्डियों के हमले को लेकर भारत के कई राज्यों में हाहाकार मचा हुआ है। किसान फसलें चौपट होने से परेशान हैं। लेकिन, पाकिस्तानी किसानों ने इस आफत को भी नुकसान की जगह मोटी कमाई का जरिया बना लिया है। सबसे बड़ी बात ये है कि इसके लिए न तो हानिकारक कीटनाशकों का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे पर्यावरण को खतरा हो और न ही टिड्डियों को फसल बर्बाद करने का ही मौका मिल पा रहा है। पाकिस्तान के ओकरा जिले में टिड्डियों की समस्या से निपटने के लिए एक बहुत ही नए तरह का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत किसानों को टिड्डियों को पकड़ना होता है, जिसका इस्तेमाल मुर्गियों के चारे के रूप में किया जाता है।मुर्गियों का चारा बनाने वाली मिलों में इन टिड्डियों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है और पोल्ट्री वाले भी इस चारे को बहुत ज्यादा पसंद कर रहे हैं। टिड्डियों से मुर्गी का चारा बनाने का विचार सबसे पहले वहां के नेशनल फूड सिक्योरिटी एंड रिसर्च में कार्यरत म...

25 किलोग्राम यूरिया का मुकाबला करेगी 2 किलोग्राम दही शत्रु कीट से फसलों की होगी सुरक्षा

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अगर आप किसान है, तो जैविक खेती में ये रामबाण ईलाज है ये ! रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक से होने वाले नुकसान के प्रति किसान सजग हो रहे हैं। जैविक तकनीक की बदौलत किसानों ने यूरिया से तौबा कर ली है। इसके बदले दही का प्रयोग कर किसानों ने अनाज, फल, सब्जी के उत्पादन में 25 से 30 फीसदी बढ़ोत्तरी भी की है । 25 किलोग्राम यूरिया का मुकाबला दो किलोग्राम दही कर रहा है। यूरिया की तुलना में दही मिश्रण का छिड़काव ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है । किसानों की माने, तो यूरिया से फसल में करीब 25 दिन तक व दही के प्रयोग से फसलों में 40 दिनों तक हरियाली रहती है। बागवानी और  फसलों  को पर्याप्त मात्रा में लंबे समय तक नाइट्रोजन व फॉस्फोरस की आपूर्ति होती रहती है|और यह काफी फायदेमंद साबित हुआ है। इस मिश्रण का प्रयोग आम व लीची में मंजर आने से करीब 15-20 दिनों पूर्व इसका प्रयोग करें। एक लीटर पानी में 30 मिलीलीटर दही के मिश्रण डाल कर घोल तैयार बना लें | इससे पौधों की पत्तियों को भीगों दें । 15 दिन बाद दोबारा यही प्रयोग करना है । इससे लीची व आम  नींबू  के पेड़ों को फॉस्फोरस व नाइट्रोजन...

ऐसा पशु प्रेमी नहीं देखा होगा आपने, पढ़िए भगत की पूरी कहानी !

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मजबूत हौंसले से सेवा भाव के चलते लोगों के बीच भगत नाम से जाना जाता है! यह व्यक्ति घायल पशुओं के इलाज से लेकर मृत पशुओं के संस्कार करने वाले इस व्यक्ति को लोग उसके असली नाम से नहीं जानते हैं। मसला ही कुछ ऐसा है कि उसे लोग भगत नाम से बुलाने लगे। और अब यहीं नाम सब जानते हैं। उत्तरप्रदेश के  शाहजहाँपुर जिले के मीरानपुर कटरा में रहने वाले भगत ने इस बारे में खुद बताया कि वैसे उनका नाम रमेश जायसवाल है। लेकिन अब लोग उन्हे भगत नाम से पुकारने लगे और यह नया नाम प्रचलन में आ गया है। सरला देवी जो कि भगत की पत्नी हैं वह कहती हैं कि वह घूमते हुए पशुओं का इलाज करते हैं।  सरला देवी आगे बताती हैं कि अगर कोई आकर बता दे कि फलां जगह कोई जानवर घायल है तो वह तुरंत ही घर बिना बताए ही निकल जाते हैं। वह पशुओं के इलाज में असावधान भी रहते हैं और कई बार कीडे पड़े घावों को हाँथ से साफ करते हैं जिसे लेकर हम घर के लोग इन पर नाराज भी हो जाते हैं। वह घर से निकल कर गोशाला निकल जाते हैं और वहाँ गायों के साथ रहते हैं उनकी सेवा में लग जाते हैं। घर में परचून की एक दुकान है वह उसके पैसे निकाल ले जाते हैं...