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Showing posts from 2020

अगर आप किसान है तो आपके मतलब की खबर, नींबू की खेती का पूरा गणित !

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 नींबू की खेती सी जुड़ी जानकारी आपको विस्तार से दी जा रही है।  नींबू अपने खट्टे और जायकेदार स्वाद के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। अंग्रेजी में लेमन नाम से प्रसिद्ध यह फल किसान भाइयों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। नींबू का पेड़ शौकिया तौर पर या घर की जरूरत के अनुसार तो सभी लगाते हैं लेकिन अगर इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाए तो साधारण अनाज की खेती से अधिक आय पाई जा सकती है। नींबू का सेवन देशभर में बड़ी मात्रा में किया जाता है साथ ही कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में नींबू युक्त उत्पादों की भरमार है। नींबू की खेती के लिए स्थान  भूमि को व्यापक रूप से जोता जाना आवश्यक है गहन जुताई के बाद खेतों को समतल किया जाना चाहिए. पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों के साथ की जगहों में नींबू का रोपण किया जाता है। ऐसी भूमि में उच्च घनत्व रोपण संभव है क्योंकि समतल जगह की तुलना में पहाड़ी ढलान पर ज्यादा कृषि उपयोग हेतु जगह उपलब्ध रहती है l लोकप्रिय नींबू के प्रकार पंजाब बारामासी ,पंजाब गलगल , पीएयू बारामासी ,यूरेका, रसराज, लिस्बन, लखनऊ बीज रहित , असम नींबू पंत नींबू, इतालवी नींबू , म...

मधुमक्खी पालन कर शहद का व्यापार शुरू करे, कम लागत में लाखो कमाए !

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शहद का व्यापार शुरू करे कमाए लाखो रुपए सालाना ! एक डिब्बे मधुमक्खी से प्राप्त होने वाले 50 किलो शहद को अक्सर 100 रु. प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है. अतः प्रत्येक डिब्बे से आपको रू 5,000 प्राप्त होते हैं. बड़े पैमाने पर इस व्यापार को करने से प्रति महीने 1 लाख 15 हज़ार रूपए तक का लाभ प्राप्त हो सकता है. इसके अलावा शहद एवं मोम के अतिरिक्त अन्य पदार्थ, जैसे गोंद (प्रोपोलिस, रायल जेली, डंक-विष) भी प्राप्त होते है। विदेशों में कई डॉलर मे इनकी बिक्री की जाती है। मधुमक्खी से प्राप्त होने वाला मोम काफी उच्च कीमतों पर बिकता हैं। कैसे शुरू करे व्यापार  शुरूआती दौर में पांच कलोनी (पांच बाक्स) से शुरू कर सकते है एक बॉक्स में लगभग में चार हजार रुपए का खर्चा आता है तो अगर आप पांच ऐसे बॉक्स लेंगे तो बीस हजार रुपए का खर्चा आता है। इनकी संख्या को बढ़ाने के लिए समय समय पर इनका विभाजन कर सकते हैं। अगर ठीक से विभाजन से कर लिया तो एक साल में 20000 हजार बक्से तैयार किए जा सकते हैं। दिल्ली में नेशनल बी बोर्ड से प्रमाणित संस्थाएं है उनसे आप मधुमक्खियों को खरीद सकते है। उद्यान विभ...

किसानो का अवैध खनन को लेकर जल सत्यग्रह

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महिला किसानो का जल  सत्याग्रह,  क्यों कर रही है विरोध ! उत्तरप्रदेश के जनपद खपटिहा कला खदान में अवैध खनन और किसानों की भूमि से जबरन निकाली जा रही बालू तथा ठेकेदारों और माफिया सिंडिकेट की दबंगई के विरोध में महिला पुरुष किसानों ने सोमवार को खदान के पास नदी में जल सत्याग्रह किया। पानी में घंटो तक बैठे रहे माफियाओं और प्रशासन के विरुद्ध जमकर  नारेबाजी की । आरोप लगाया कि बालू माफिया किसानों को धमकी दे रहे हैं सोमवार को दर्जनों महिलाओं पुरुषों ने नदी की जलधारा में बैठकर जल सत्याग्रह किया। जल सत्यग्रह करते किसान  कुछ ही देर बाद पुलिस की मौजूदगी भी  आंदोलन चला। दोपहर को एसडीएम राम कुमार और पुलिस क्षेत्र अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत की प्रशाशन की नोकझोंक भी हुई किसानों ने आरोप लगाया कि बालू खदानों के गुर्गे महिला किसानों से अश्लीलता कर रहे हैं। आंदोलन कर रही ऊषा निषाद आदि ने एसडीएम को इस बाबत ज्ञापन भी सौंपा। इस पर एसडीएम ने पैलानी क्षेत्राधिकारी और तहसीलदार तथा जिला खनिज अधिकारी को पत्र जारी कर पूछा ऊषा निषाद और अन्...

किसान टिड्डियों से कमा रहे प्रतिदिन के 20 हजार रुपए, जाने कैसे ?

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एक तरफ भारत के किसान  टिड्डियों से परेशान है तो वही दूसरी और पाकिस्तान के किसान इन्ही टिड्डियों से पैसा कमाने में लगे है !  टिड्डियों के हमले को लेकर भारत के कई राज्यों में हाहाकार मचा हुआ है। किसान फसलें चौपट होने से परेशान हैं। लेकिन, पाकिस्तानी किसानों ने इस आफत को भी नुकसान की जगह मोटी कमाई का जरिया बना लिया है। सबसे बड़ी बात ये है कि इसके लिए न तो हानिकारक कीटनाशकों का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे पर्यावरण को खतरा हो और न ही टिड्डियों को फसल बर्बाद करने का ही मौका मिल पा रहा है। पाकिस्तान के ओकरा जिले में टिड्डियों की समस्या से निपटने के लिए एक बहुत ही नए तरह का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत किसानों को टिड्डियों को पकड़ना होता है, जिसका इस्तेमाल मुर्गियों के चारे के रूप में किया जाता है।मुर्गियों का चारा बनाने वाली मिलों में इन टिड्डियों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है और पोल्ट्री वाले भी इस चारे को बहुत ज्यादा पसंद कर रहे हैं। टिड्डियों से मुर्गी का चारा बनाने का विचार सबसे पहले वहां के नेशनल फूड सिक्योरिटी एंड रिसर्च में कार्यरत म...

25 किलोग्राम यूरिया का मुकाबला करेगी 2 किलोग्राम दही शत्रु कीट से फसलों की होगी सुरक्षा

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अगर आप किसान है, तो जैविक खेती में ये रामबाण ईलाज है ये ! रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक से होने वाले नुकसान के प्रति किसान सजग हो रहे हैं। जैविक तकनीक की बदौलत किसानों ने यूरिया से तौबा कर ली है। इसके बदले दही का प्रयोग कर किसानों ने अनाज, फल, सब्जी के उत्पादन में 25 से 30 फीसदी बढ़ोत्तरी भी की है । 25 किलोग्राम यूरिया का मुकाबला दो किलोग्राम दही कर रहा है। यूरिया की तुलना में दही मिश्रण का छिड़काव ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है । किसानों की माने, तो यूरिया से फसल में करीब 25 दिन तक व दही के प्रयोग से फसलों में 40 दिनों तक हरियाली रहती है। बागवानी और  फसलों  को पर्याप्त मात्रा में लंबे समय तक नाइट्रोजन व फॉस्फोरस की आपूर्ति होती रहती है|और यह काफी फायदेमंद साबित हुआ है। इस मिश्रण का प्रयोग आम व लीची में मंजर आने से करीब 15-20 दिनों पूर्व इसका प्रयोग करें। एक लीटर पानी में 30 मिलीलीटर दही के मिश्रण डाल कर घोल तैयार बना लें | इससे पौधों की पत्तियों को भीगों दें । 15 दिन बाद दोबारा यही प्रयोग करना है । इससे लीची व आम  नींबू  के पेड़ों को फॉस्फोरस व नाइट्रोजन...

ऐसा पशु प्रेमी नहीं देखा होगा आपने, पढ़िए भगत की पूरी कहानी !

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मजबूत हौंसले से सेवा भाव के चलते लोगों के बीच भगत नाम से जाना जाता है! यह व्यक्ति घायल पशुओं के इलाज से लेकर मृत पशुओं के संस्कार करने वाले इस व्यक्ति को लोग उसके असली नाम से नहीं जानते हैं। मसला ही कुछ ऐसा है कि उसे लोग भगत नाम से बुलाने लगे। और अब यहीं नाम सब जानते हैं। उत्तरप्रदेश के  शाहजहाँपुर जिले के मीरानपुर कटरा में रहने वाले भगत ने इस बारे में खुद बताया कि वैसे उनका नाम रमेश जायसवाल है। लेकिन अब लोग उन्हे भगत नाम से पुकारने लगे और यह नया नाम प्रचलन में आ गया है। सरला देवी जो कि भगत की पत्नी हैं वह कहती हैं कि वह घूमते हुए पशुओं का इलाज करते हैं।  सरला देवी आगे बताती हैं कि अगर कोई आकर बता दे कि फलां जगह कोई जानवर घायल है तो वह तुरंत ही घर बिना बताए ही निकल जाते हैं। वह पशुओं के इलाज में असावधान भी रहते हैं और कई बार कीडे पड़े घावों को हाँथ से साफ करते हैं जिसे लेकर हम घर के लोग इन पर नाराज भी हो जाते हैं। वह घर से निकल कर गोशाला निकल जाते हैं और वहाँ गायों के साथ रहते हैं उनकी सेवा में लग जाते हैं। घर में परचून की एक दुकान है वह उसके पैसे निकाल ले जाते हैं...

किसान के घर में क्यों हुआ अचानक ब्लास्ट , जंगली जानवरो से था परेशान किसान !

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किसान के घर मे अचानक हुआ विस्फोट ,बच्ची समेत 2 लोग गंभीर रूप से घायल ! उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ के थाना बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव जखेड़ा में अचानक हुए जोरदार धमाके से इलाके में हड़कंप मच गया, दरअसल किसान द्वारा खेतो में जंगली जानवर  भगाने के लिए घर में इमामदस्ते में एक साथ गंधक-पोटाश कूटने से अचानक जोरदार धमाका हो गया, धमाके में किसान के साथ एक बच्ची घायल हो गई, आनन-फानन में ग्रामीणों ने दोनों घायलों को भर्ती अस्पताल में भर्ती कराया, जहां घायल किसान को गंभीर हालत के चलते मेरठ रेफर कर दिया गया, तो वही घायल बच्ची का गढ़मुक्तेश्वर अस्पताल में इलाज चल रहा है। दरअसल आपको  बता दें आज बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव जा खेड़ा में इश्तेकार नामक युवक खेतों से बंदर व जंगली जानवर भगाने के लिए गंधक पोटाश का मिश्रण तैयार कर रहा था, जिससे मिश्रण तैयार करते समय अचानक आग लग गई, और विस्फोट हो गया, अचानक हुए इस विस्फोट से इस प्रकार का सीधा हाथ जख्मी हो गया, और घर में खेल रही 7 वर्षीय बच्ची आशिया भी घायल हो गई, विस्फोट की आवाज से आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया, आनन-फ...

पिछले 68 सालों में पीपल, बरगद, नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना क्यों बन्द हुआ !

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क्या आप जानते है, पीपल बरगद नीम आदि पेड़ों को सरकार ने क्यो लगवाना बंद किया आइए जानते है विस्तार से ! पिछले 68 सालों में पीपल, बरगद,पकड़ी और नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना क्यों  बन्द किया गया है पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजार्बर है, बरगद 80% और नीम 75 %  अब सरकार ने इन पेड़ों से दूरी बना ली तथा इसके बदले विदेशी यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया जो जमीन को जल विहीन कर देता है आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ो ने ले ली है अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा  हर 500 मीटर की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगाए जाए तो आने वाले कुछ साल भर बाद प्रदूषण मुक्त हिन्दुस्तान होगा  वैसे आपको एक और जानकारी दे दी जाए पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है जिसकी वजह शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं। पीपल को वृक्षों का राजा कहते है।  अब करने योग्य कार्य इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगाया जाए तथा यूकेलिप्टस पर बैन लगाया...

लॉकडाउन ने तोड़ी किसानो की कमर, नहीं चाहिए अब मोदी सरकार से 'कर्ज'

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3 लाख रुपए ब्याज़ पर लेकर की थी फूल की खेती, आज खड़ी फसल को ट्रेक्टर चलाकर उजाड़ दी , लॉकडाउन किसानों के लिए बना काल ।  विश्वभर में कोरोना वायरस से हाहाकार मचा हैं, देश में भी कोरोना वायरस ने अपने पेर पसार लिए हैं, कोरोना वायरस का बड़ा असर किसानों पर काल बनकर टूट रहा हैं , मेरठ मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर दूर मेरठ ब्लॉक के रिठानी गांव  के रहने वाले किसान सोनू पिछले 8 सालों से लगातार खेती कर रहे हैं हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी फूल की खेती की थी लगभग 40 बीघा फूल खेत मे खड़ा है ,  सोनू बताते हैं की हम हर साल फूल  व सब्जी की खेती करते हैं, लॉकडाउन के चलते हैं हमारी फसल को काफी नुकसान हुआ है, जो हर वर्ष 50 से 60 रुपए प्रतिकिलो बेचा जाता था, आज वह पशुओं को खिलाया जा रहा है, किसान की हालत सरकार क्या जाने वह आगे बताते हैं की हमने 3 लाख रुपए ब्याज पर लिए थे जिसे हम फूल से अच्छा मुनाफ़ा कमा सकें, पैसा डूब चुका है फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, मजदूरों का पैसा भी जेब से देना पड़ रहा है, क्या करें किसान तो सड़क पर आ गया । लॉकडाउन किसानों के लिए काल बनकर टूटा  सोनू बताते हैं कि ल...

क्या आप फालसा (फल) के बारे में जानते है , इस फल में सबसे ज्यादा आइरन पाया जाता है

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फालसा व आड़ू की खेती बड़े पैमाने पर लॉकडाउन का असर बाग पर भी पड़ा मेरठ  जनपद के सर्किट हॉउस में फालसा आड़ू व आम की खेती कर रहे गंगाराम को इस बार बड़ा झटका लगा है , वह बताते है कि हमने इस बार बाग ठेके की नीलामी में हिस्सा बने जो 81 हज़ार की रकम तय की गई , महज कुछ ही दिन बाद लॉकडाउन लग गया और आड़ू व फालसा की फसल पूरी तरह तैयार हैं उधर आम का सीजन भी आ गया हैं , पता नही लॉकडाउन कब खुलेगा हमे तो इस बार बड़ा झटका लगा हैं पूरा परिवार बाग की निगरानी में लगा है छोटे बच्चे से लेकर बड़े सब लोग बाग की देखभाल में लगे है , लेकिन अब माल लेकर मंडी लेकर जाते भी है तो सही दाम नही मिल रहा , बस यही है अब जो सर्किट हाउस में लोग सुबह शाम घूमने आते है वो ही कुछ माल यहाँ से ले जाते है जिस से कुछ हमारी जमा राशि का हिस्सा निकल रहा हैं । पेड़ों पर फालसा व आड़ू की भरमार फसल    गंगाराम बताते है कि इस समय फालसा व आड़ू की अच्छी पैदावार है लेकिन लॉकडाउन से बड़ा झटका इस बार लगा हैं, आगे बताते है कि इस बार माल यही से बेचा जा रहा हैं जो लोग सर्किट हाउस में घूमने आते है वो ही लोग यहाँ से खरीद कर ले जाते हैं, लेकिन माल ज...

कितना ख़तरनाक हो सकता है टिड्डियों का हमला ?

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किसान रहे सतर्क , टिड्डी कीट से बचने के उपाय ! टिड्डी कीट के नाम से अधिकतर लोग परिचित होंगे, यह लगभग दो से ढाई इंच लम्बा कीट होता है। यह बहुत ही डरपोक होने के कारण समूह मे रहते हैं। टिड्डी दल किसानों का सबसे बड़ा शत्रु है।  टिड्डियाँ 1 दिन में 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती हैं हालांकि इनके आगे बढ़ने की दिशा हवा की गति पर निर्भर करती है। टिड्डी दल सामूहिक रूप से लाखों की संख्या में झुंड/समूह बनाकर पेड़ - पौधे एवं वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यह दल 15 से 20 मिनट में आपकी फसल के पत्तियों को पूर्ण रूप से खाकर नष्ट कर सकते हैं। यह सभी प्रकार के हरे पत्तों पर आक्रमण करते हैं। ये टिड्डी दल किसी क्षेत्र में शाम 6 से 8 बजे के आस-पास पहुँचकर जमीन पर बैठ जाते हैं। टिड्डी दल शाम के समय समूह में पेड़ों, झाड़ियों एवं फसलों पर बसेरा करते हैं और वही पर रात गुजारते हैं तथा रात भर फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं और फिर सुबह 8 -9 बजे के करीब उड़ान भरते हैं। अंडा देने की अवधि में इनका दल एक स्थान पर 3 से 4 दिन तक रुक जाता है। आप लोगों को अवगत कराना है कि बड़े आकार का टिड्डी दल राजस्थान...

उत्तरप्रदेश के अकेले किसान चीकू व लोकट की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं, कमाते है लाखो रुपए सालाना

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उत्तरप्रदेश के अकेले किसान चीकू व लोकट की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं, कमाते है लाखो रुपए सालाना  उत्तरप्रदेश के मेरठ जनपद मुख्यालय से लगभग 13 किलोमीटर दूर डोरली गांव के रहने वाले विजयपाल पिछले 8 सालों से चीकू व लोकाट की बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं , वह दावा कर बताते है कि पूरे उत्तरप्रदेश में बड़े पैमाने पर मैं एक अकेला किसान हु जो चीकू व लोकाट की खेती कर रहा हूँ ,  वह आगे बताते है कि मैंने 15 बीघा में चीकू व लोकाट के पेड़ लगाए हुए हैं जिसमे मेरा फल अन्य राज्यो में जाता हैं, लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते अपने फल को फर्म के बाहर ही रख कर बेचना पड़ रहा , नुकसान है लेकिन इतना नही हैं क्यों कि हमारा फल इस लिए बिक रहा हैं यहाँ लोग आते है खुद ही तोड़ कर ले जाते हैं । अधिकतर फोन पर ही ऑर्डर मिलते हैं विजयपाल आगे बताते हैं कि हमें अधिकतर फोन पर ही आर्डर मिलते हैं, क्योंकि हमारा फल थोड़ा महंगा इसलिए भी है मेहनत ज्यादा लगती है और साफ व स्वच्छ प्राकृतिक चीकू व लोकाट है , हम कोई भी बाहर का उर्वरक नही लगाते सब जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं । अपने फर्म पर 5 से 7 मजदूरों को रोजग...