लॉकडाउन ने तोड़ी किसानो की कमर, नहीं चाहिए अब मोदी सरकार से 'कर्ज'
3 लाख रुपए ब्याज़ पर लेकर की थी फूल की खेती, आज खड़ी फसल को ट्रेक्टर चलाकर उजाड़ दी , लॉकडाउन किसानों के लिए बना काल ।
विश्वभर में कोरोना वायरस से हाहाकार मचा हैं, देश में भी कोरोना वायरस ने अपने पेर पसार लिए हैं, कोरोना वायरस का बड़ा असर किसानों पर काल बनकर टूट रहा हैं , मेरठ मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर दूर मेरठ ब्लॉक के रिठानी गांव के रहने वाले किसान सोनू पिछले 8 सालों से लगातार खेती कर रहे हैं हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी फूल की खेती की थी लगभग 40 बीघा फूल खेत मे खड़ा है , सोनू बताते हैं की हम हर साल फूल व सब्जी की खेती करते हैं, लॉकडाउन के चलते हैं हमारी फसल को काफी नुकसान हुआ है, जो हर वर्ष 50 से 60 रुपए प्रतिकिलो बेचा जाता था, आज वह पशुओं को खिलाया जा रहा है, किसान की हालत सरकार क्या जाने वह आगे बताते हैं की हमने 3 लाख रुपए ब्याज पर लिए थे जिसे हम फूल से अच्छा मुनाफ़ा कमा सकें, पैसा डूब चुका है फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, मजदूरों का पैसा भी जेब से देना पड़ रहा है, क्या करें किसान तो सड़क पर आ गया ।
लॉकडाउन किसानों के लिए काल बनकर टूटा
सोनू बताते हैं कि लॉकडाउन किसानों के लिए काल बनकर टूटा है, जिससे किसान अपनी खड़ी फसलों पर ट्रैक्टर चलाकर उसे नष्ट कर रहे हैं, 40 बीघा फूल है कहां लेकर जाए उसे, क्या करें इतने फूल का , तीन से 4 लाख रुपए की लागत लगी हैं मजदूरों सहित, भविष्य संकट में दिखाई दे रहा हैं, सरकार हमारी मदद करे कुछ तो हमारे गरीब किसानों की सहायता करे जिस से हम खड़े हो सके ।
3 लाख रुपए ब्याज पर लिए थे , आज कर्जदार घर चक्कर काट रहे है
सोनू आगे बताते हैं कि हमने 3 लाख रुपए ब्याज पर लेकर अपनी फूल की फसल की पैदावार की थी, ताकि अच्छा मुनाफा मिल सके और घर का खर्च भी चल सके लेकिन ऐसा नहीं हुआ आज कर्जदार घर चक्कर काट रहे हैं मजदूरों का भुगतान नहीं हो पाया ऐसे में हम कहां जाएं मजबूर है चौपट हो चुका साहब ।
खड़ी फसल को ट्रेक्टर से चलाकर उजाड़ डाली
सोनू आगे बताते हैं की हमने लॉकडाउन खुलने का इंतजार किया था, खुल जाए तो हमारा फूल किसी तरह बिक जाता लेकिन ऐसा नहीं हुआ 40 दिन का लॉकडाउन हो चुका पौधों पर फूल इतना लगा है कि पौधे झुकने लगे , अब कहां तक इंतजार करें फूल तो बिकने वाला नहीं है , तो सोचा अब खेत में खड़े फूल पर ही ट्रैक्टर से खेत की जुताई कर दे , ताकि दूसरी फसल की बुवाई कर सकें कम से कम वह तो बच जाएगा जुताई करने में भी खर्चा आ रहा है बताओ किसान की तो कमर टूट गई साहब ।
पशुओं को खिला रहे है चारे के रूप में
सोनू आगे बताते हैं की पशुओं को चारे के रूप में खिला रहे हैं वैसे तो पशु फूल को नहीं खाते लेकिन इसकी पत्तियां खा लेती हैं , पहले पशुओं को खेत से भगा दिया जाता था ताकि फसल नष्ट ना हो । आज पशुओं को हम खुद खेत में छोड़ रहे हैं ताकि चारे का तो खर्च कम हो और पशु अपना पेट भर ले ।
मजदूरों का पैसा भी नही दिया जा रहा
सोनू आगे बताते हैं कि हमारे यहां कई मजदूर भी काम करते हैं और उनकी दिहाड़ी का पैसा भी हमसे नहीं दिया जा रहा जब हमारे पास ही पैसा नहीं तो उन्हें कहां से दिया जाए , मजदूर भी उल्टा सीधा बोल कर में चले जाते हैं क्योंकि उनके सामने भी बड़ा संकट है क्या करें , आमदनी चारों और से खत्म हो चुकी है कोई नया पैसा हमारे पास नहीं आ रहा ।
किसानों का घर का खर्च चलना मुश्किल हो रहा हैं
सोनू आगे बताते हैं के अब तो घर का खर्च चलना भी बड़ा मुश्किल हो रहा है किसी तरह दुकानदारों से उधार लेकर घर का खर्च चला रहे हैं , कब तक ऐसा चलता रहेगा किसान परेशान है ,बेहाल है ,मजबूर है आत्महत्या के अलावा और कुछ नहीं बचता बच्चे अलग से परेशान है ।
मोहित कुमार सैनी
8126154033
8534035047
मेरठ



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