उत्तरप्रदेश के अकेले किसान चीकू व लोकट की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं, कमाते है लाखो रुपए सालाना
उत्तरप्रदेश के अकेले किसान चीकू व लोकट की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं, कमाते है लाखो रुपए सालाना
उत्तरप्रदेश के मेरठ जनपद मुख्यालय से लगभग 13 किलोमीटर दूर डोरली गांव के रहने वाले विजयपाल पिछले 8 सालों से चीकू व लोकाट की बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं , वह दावा कर बताते है कि पूरे उत्तरप्रदेश में बड़े पैमाने पर मैं एक अकेला किसान हु जो चीकू व लोकाट की खेती कर रहा हूँ , वह आगे बताते है कि मैंने 15 बीघा में चीकू व लोकाट के पेड़ लगाए हुए हैं जिसमे मेरा फल अन्य राज्यो में जाता हैं, लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते अपने फल को फर्म के बाहर ही रख कर बेचना पड़ रहा , नुकसान है लेकिन इतना नही हैं क्यों कि हमारा फल इस लिए बिक रहा हैं यहाँ लोग आते है खुद ही तोड़ कर ले जाते हैं ।
अधिकतर फोन पर ही ऑर्डर मिलते हैं
विजयपाल आगे बताते हैं कि हमें अधिकतर फोन पर ही आर्डर मिलते हैं, क्योंकि हमारा फल थोड़ा महंगा इसलिए भी है मेहनत ज्यादा लगती है और साफ व स्वच्छ प्राकृतिक चीकू व लोकाट है , हम कोई भी बाहर का उर्वरक नही लगाते सब जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं ।
अपने फर्म पर 5 से 7 मजदूरों को रोजगार भी दिया हैं
विजयपाल आगे बताते हैं कि हमारा 15 बीघा का फार्म है, जिसमें चीकू की पैदावार होती है उसकी देखरेख करने के लिए हमने गांव की कुछ महिलाएं व पुरुष जिसमे 5 से 7 लोग को रोजगार दे रखा है । उनका घर का खर्च व रोजी-रोटी अच्छी चलती है, आज वह भी सोचते है कि अपने जमीन में हम भी चीकू की बागवानी कर ले ।
देश के नही बल्कि विदेशो तक के किसान लोग खेती देखने आते हैं
विजयपाल आगे बताते हैं की हमारी खेती को देश के लोग अन्य राज्यों के किसान हमारी बागवानी को देखने आते हैं , और सलाह लेते हैं कि किस प्रकार चीकू की खेती की जाती है। इतना ही नहीं विदेशों के बड़े किसान भी मेरे फार्म पर कई बार बागवानी को देखने आए हैं और वह सलाह लेते हैं लेकिन हमें अंग्रेजी तो नही आती जो उनके साथ आते है वो बताते है ।जिससे हमें काफी अच्छा लगता है ।
बागवानी में मल्टीक्रोपिंग करते है
विजयपाल आगे बताते हैं कि हमने अपनी बागवानी में चीकू व लोकाट के बड़े पैमाने पर पौधे लगाए हैं। उसके बीच हमने 30 से अधिक आंवले के पेड़ भी लगाए हैं जिससे हमारे 12 महीने कुछ ना कुछ चलता रहता है । और हम खेती को न अपनाकर बागवानी को अपनाया है जिससे अच्छा मुनाफा पा लेते हैं और मेहनत भी कम लगती है।
लॉकडाउन का असर पड़ा लेकिन उतना नही
विजयपाल आगे बताते हैं की कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन है और लोग परेशानी से जूझ भी रहे हैं। किसान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके लेकिन अगर हम अपने बागवानी की बात करें तो हमारा फल मंडी तक पहुंच रहा है और अच्छा पैसा भी मिल रहा है क्योंकि अधिकतर हमने अपने फल को अपने फार्म के बाहर ही बेचना शुरू कर दिया और आसपास के लोग हमारे फार्म से फल खरीद कर ले जाते हैं ।
5 से 7 लाख रुपए प्रतिवर्ष कमा लेते हैं
विजयपाल आगे कमाई की बात करते हुए बताते हैं की हम चीकू व लोकाट आंवले की बात करें तो साल भर में 5 से 7 लाख रुपए आराम से कमा लेते हैं। और यह हमारे लिए काफी है इसमें हमारा कुछ खर्चा नहीं लगता जैविक खाद लगता है वह हमारी देसी गाय से तैयार हो जाता है। तो ज्यादा खर्चा नहीं आता लाने और ले जाने का ही खर्च आता है बाकी तो सब मुनाफा ही है ।
मोहित कुमार सैनी
मेरठ
उत्तरप्रदेश के मेरठ जनपद मुख्यालय से लगभग 13 किलोमीटर दूर डोरली गांव के रहने वाले विजयपाल पिछले 8 सालों से चीकू व लोकाट की बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं , वह दावा कर बताते है कि पूरे उत्तरप्रदेश में बड़े पैमाने पर मैं एक अकेला किसान हु जो चीकू व लोकाट की खेती कर रहा हूँ , वह आगे बताते है कि मैंने 15 बीघा में चीकू व लोकाट के पेड़ लगाए हुए हैं जिसमे मेरा फल अन्य राज्यो में जाता हैं, लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते अपने फल को फर्म के बाहर ही रख कर बेचना पड़ रहा , नुकसान है लेकिन इतना नही हैं क्यों कि हमारा फल इस लिए बिक रहा हैं यहाँ लोग आते है खुद ही तोड़ कर ले जाते हैं ।
अधिकतर फोन पर ही ऑर्डर मिलते हैं
विजयपाल आगे बताते हैं कि हमें अधिकतर फोन पर ही आर्डर मिलते हैं, क्योंकि हमारा फल थोड़ा महंगा इसलिए भी है मेहनत ज्यादा लगती है और साफ व स्वच्छ प्राकृतिक चीकू व लोकाट है , हम कोई भी बाहर का उर्वरक नही लगाते सब जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं ।
अपने फर्म पर 5 से 7 मजदूरों को रोजगार भी दिया हैं
विजयपाल आगे बताते हैं कि हमारा 15 बीघा का फार्म है, जिसमें चीकू की पैदावार होती है उसकी देखरेख करने के लिए हमने गांव की कुछ महिलाएं व पुरुष जिसमे 5 से 7 लोग को रोजगार दे रखा है । उनका घर का खर्च व रोजी-रोटी अच्छी चलती है, आज वह भी सोचते है कि अपने जमीन में हम भी चीकू की बागवानी कर ले ।
देश के नही बल्कि विदेशो तक के किसान लोग खेती देखने आते हैं
विजयपाल आगे बताते हैं की हमारी खेती को देश के लोग अन्य राज्यों के किसान हमारी बागवानी को देखने आते हैं , और सलाह लेते हैं कि किस प्रकार चीकू की खेती की जाती है। इतना ही नहीं विदेशों के बड़े किसान भी मेरे फार्म पर कई बार बागवानी को देखने आए हैं और वह सलाह लेते हैं लेकिन हमें अंग्रेजी तो नही आती जो उनके साथ आते है वो बताते है ।जिससे हमें काफी अच्छा लगता है ।
बागवानी में मल्टीक्रोपिंग करते है
विजयपाल आगे बताते हैं कि हमने अपनी बागवानी में चीकू व लोकाट के बड़े पैमाने पर पौधे लगाए हैं। उसके बीच हमने 30 से अधिक आंवले के पेड़ भी लगाए हैं जिससे हमारे 12 महीने कुछ ना कुछ चलता रहता है । और हम खेती को न अपनाकर बागवानी को अपनाया है जिससे अच्छा मुनाफा पा लेते हैं और मेहनत भी कम लगती है।
लॉकडाउन का असर पड़ा लेकिन उतना नही
विजयपाल आगे बताते हैं की कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन है और लोग परेशानी से जूझ भी रहे हैं। किसान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके लेकिन अगर हम अपने बागवानी की बात करें तो हमारा फल मंडी तक पहुंच रहा है और अच्छा पैसा भी मिल रहा है क्योंकि अधिकतर हमने अपने फल को अपने फार्म के बाहर ही बेचना शुरू कर दिया और आसपास के लोग हमारे फार्म से फल खरीद कर ले जाते हैं ।
5 से 7 लाख रुपए प्रतिवर्ष कमा लेते हैं
विजयपाल आगे कमाई की बात करते हुए बताते हैं की हम चीकू व लोकाट आंवले की बात करें तो साल भर में 5 से 7 लाख रुपए आराम से कमा लेते हैं। और यह हमारे लिए काफी है इसमें हमारा कुछ खर्चा नहीं लगता जैविक खाद लगता है वह हमारी देसी गाय से तैयार हो जाता है। तो ज्यादा खर्चा नहीं आता लाने और ले जाने का ही खर्च आता है बाकी तो सब मुनाफा ही है ।
मोहित कुमार सैनी
मेरठ



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