किसान टिड्डियों से कमा रहे प्रतिदिन के 20 हजार रुपए, जाने कैसे ?
एक तरफ भारत के किसान टिड्डियों से परेशान है तो वही दूसरी और पाकिस्तान के किसान इन्ही टिड्डियों से पैसा कमाने में लगे है !
टिड्डियों के हमले को लेकर भारत के कई राज्यों में हाहाकार मचा हुआ है। किसान फसलें चौपट होने से परेशान हैं। लेकिन, पाकिस्तानी किसानों ने इस आफत को भी नुकसान की जगह मोटी कमाई का जरिया बना लिया है। सबसे बड़ी बात ये है कि इसके लिए न तो हानिकारक कीटनाशकों का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे पर्यावरण को खतरा हो और न ही टिड्डियों को फसल बर्बाद करने का ही मौका मिल पा रहा है। पाकिस्तान के ओकरा जिले में टिड्डियों की समस्या से निपटने के लिए एक बहुत ही नए तरह का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत किसानों को टिड्डियों को पकड़ना होता है, जिसका इस्तेमाल मुर्गियों के चारे के रूप में किया जाता है।मुर्गियों का चारा बनाने वाली मिलों में इन टिड्डियों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है और पोल्ट्री वाले भी इस चारे को बहुत ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
इससे पहले पाकिस्तान में पोल्ट्री ब्रीडर्स और जानवरों का चारा बनाने वाली कंपनियों ने कुछ हफ्तों तक ब्रॉयलर चिकन पर टिड्डियों वाले चारे के प्रभाव का आंकलन किया था, जो बहुत ही प्रभावी साबित हुआ। दरअसल, इनकी न्यूट्रिशनल वैल्यू काफी अच्छी होती है। क्योंकि, इसे बिना किसी कीटनाशकों के छिड़काव के पकड़ा जाता है। इसलिए इन्हें मछली, पोल्ट्री और डेरी वालों को दिया जा सकता है। आमतौर पर पोलट्री क्षेञ में प्रोटीन के लिए सोयाबीन का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें 45 फीसदी प्रोटीन होता है, जबकि टिड्डों में 70 फीसदी। इन्हें खाने के लिए तैयार करने में भी ज्यादा खर्च नहीं करना होता, क्योंकि इन्हें सिर्फ पकड़कर सुखाना होता है। अब पायलट प्रोजेक्ट के अगुवा इस तरकीब के व्यापारिक प्रयोग पर दिमाग लगा रहे हैं। मसलन, जौहर का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते लोगों के रोजगार खत्म हो गए हैं। उन सबको टिड्डियों को पकड़ने और बेचने के काम में लगाया जा सकता है। इस काम का दायरा ग्रामीण इलाकों में और रेगिस्तानी क्षेत्रों में बढ़ाया जा सकता है, जिससे कमाई भी बढ़ सकती है। खुर्शीद ने सरकार से भी मांग की है कि निजी पोल्ट्री और चारा मिलों को भी इसके इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ ही जिन जगहों पर टिड्डियों को पकड़ने का काम होता है, वहां कीटनाशको के इस्तेमाल पर रोक लगनी चाहिए।
किसान समूह डेस्क
मोहित कुमार सैनी
मेरठ



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